करवा चौथ व्रत कथा एवं आरती – karva mata ki aarti

karva mata ki aarti

Karva Mata ki Aarti : करवा चौथ व्रत महिलाओं का पारंपरिक व्रत है जो भारतीय साहित्य, संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है, और यह व्रत विशेष खुशी और प्रेम का प्रतीक होता है।

करवा चौथ व्रत अक्टूबर और नवम्बर के बीच मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन सूबह से व्रत रखती हैं और खास तरीके से तैयार किए गए भोजन का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा करती हैं। यह व्रत उनके पतियों की दीर्घायु, सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना के साथ होता है।

इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पतियों की लम्बी और सुरक्षित जीवन की प्राप्ति के लिए होता है, और इसे आशीर्वाद का रूप माना जाता है।

करवा चौथ व्रत महिलाओं के पारिवारिक और सामाजिक महत्व को प्रकट करने का अवसर होता है, और इसे साझा करने से उनका बंधन और प्यार मजबूत होता है। यह एक खास तरीके से स्त्री-पुरुष संबंधों का महत्वपूर्ण पारंपरिक पर्व होता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्यार और समरसता का प्रतीक होता है।

 

करवा चौथ व्रत की सामग्री इस प्रकार है:

  • मिट्टी या तांबे का करवा और ढक्कन
  • पान
  • कलश
  • चंदन
  • फूल
  • हल्दी
  • चावल
  • मिठाई
  • कच्चा, दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर का बूरा
  • रोली, कुमकुम, मौली
  • अठावरी (आठ पूरियां)
  • हलुआ
  • दक्षिणा के लिए पैसे

करवा चौथ व्रत कथा के लिए कुछ अन्य सामग्री भी आवश्यक हो सकती हैं, जैसे:

  • गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
  • लकड़ी का आसन
  • चलनी

करवा चौथ व्रत की सामग्री को एक थाली में रखा जाता है। इस थाली को “करवा चौथ की थाली” कहा जाता है।

करवा चौथ व्रत की सामग्री का विशेष महत्व है। करवा का प्रतीक है सुहाग और गौरी का प्रतीक है सुख और समृद्धि। इस व्रत में इन दोनों देवीयों की पूजा की जाती है।

 

करवा चौथ व्रत की विधि इस प्रकार है:

  • शाम को चंद्रमा निकलते ही, उसे छलनी से देखें और उसके सामने जल, दूध, चावल, फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  • फिर, अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए, चांद को अर्घ्य दें।
  • चांद को अर्घ्य देने के बाद, अपने हाथों से खीर या दूध पी लें।
  • फिर, अपने पति के हाथों से खाना खाएं।

करवा चौथ व्रत खोलने के कुछ महत्वपूर्ण नियम इस प्रकार हैं:

  • चांद को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें।
  • चांद को अर्घ्य देने से पहले किसी से बात न करें।
  • चांद को अर्घ्य देने के बाद, तुरंत ही कुछ भी न खाएं।
  • चांद को अर्घ्य देने के बाद, अपने पति के हाथों से ही खाना खाएं।

करवा चौथ व्रत खोलने(Karva Mata ki Aarti) के बाद, कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • व्रत खोलने के बाद, धीरे-धीरे खाना खाएं।
  • व्रत खोलने के बाद, आराम करें।

करवा चौथ व्रत खोलने के बाद, महिलाएं अपने पति के साथ मिलकर करवा माता की कथा सुनती हैं। करवा माता की कथा सुनने से महिलाओं को सुख, समृद्धि और पुत्र प्राप्ति की प्राप्ति होती है।

करवा चौथ व्रत कथा एवं आरती – karva mata ki aarti lyrics

ऊँ जय करवा मइया, माता जय करवा मइया ।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया ।। ऊँ जय करवा मइया।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी ।। ऊँ जय करवा मइया।

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती ।। ऊँ जय करवा मइया।

होए सुहागिन नारी, सुख सम्पत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।। ऊँ जय करवा मइया।

करवा मइया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।। ऊँ जय करवा मइया।

 

करवा चौथ व्रत की कहानी – karva mata ki katha

करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा

एक गांव मे एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी और उसके लड़को की सातों बहुओ ने और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के काम से लोट कर भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन मुस्क़ुरते हुए बोली – भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देने के पश्चात ही मैं आज भोजन करूंगी।

 

साहूकार के सातो बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, वे सतो भाई अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुए। साहूकार के बेटे तुरंत घर से बाहर चले गए और कुछ दुरी पर जा कर एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। इसलिए अब तुम उन्हें चाँद को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी बहुत खुश हुए और उसने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी चाँद को अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

 

लेकिन साहूकार की बेटी को अपने भाईओ पर बहुत यकीन था की वो उससे झूठ नहीं बोलेंगे उसने अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार साहूकार की बेटी का करवा चौथ व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बहुत बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।

 

साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने तुरंत गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत करना शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

 

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

करवा चौथ माता की जय !

 

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